निम्नलिखित गद्यांश के रिक्त स्थानों की पूर्ति गद्यांश के नीचे दिए गए प्रश्नों के अनुसार कीजिए -
प्रसन्न रहना ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है। प्रसन्नता मानव को ईश्वर का दिया हुआ अनुपम उपहार है। आज के व्यक्ति को प्रसन्नता व मानसिक शांति की इसलिए ______(1) है क्योंकि अधिकांश मनुष्य अपने जीवन से ______(2) है। खुश रहना सरल नहीं है। व्यर्थ ही भविष्य की ________(3) बनाते रहना और अतीत की अप्रिय घटनाओं में खोए रहना प्रसन्नता प्राप्ति में _________(4) है। प्रसन्न रहकर हम _______(5) के कृपा पात्र बन सकते हैं।
गद्यांश में संकेतित रिक्त स्थान (5) के लिए उपयुक्त शब्द होगा।
- Aप्रधानमंत्री
- Bईश्वर
- Cसहायक
- Dमंत्री
Solution & Step-by-step Explanation
गद्यांश की शुरुआत में ही कहा गया है कि "प्रसन्न रहना ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है।" इसलिए अंतिम वाक्य में "प्रसन्न रहकर हम ईश्वर के कृपा पात्र बन सकते हैं" सबसे तर्कसंगत और उपयुक्त रूप से बैठता है।