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CUET Hindi Mock Test - 1

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Question No: 6Difficulty: mediumMarks: 1mcqAnswered correctly: 0%
निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय, सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिये कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय, नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वत्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रण कला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपनी सानी नहीं रखते थे। प्राचीन काल में मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन-फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।

गद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
Question No: 7Difficulty: mediumMarks: 1mcqAnswered correctly: 9%
निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय, सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिये कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय, नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वत्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रण कला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपनी सानी नहीं रखते थे। प्राचीन काल में मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन-फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।

पुस्तकालयों के द्वारा भारत को क्या गौरव प्राप्त था?
Question No: 8Difficulty: mediumMarks: 1mcqAnswered correctly: 9%
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साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय, सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिये कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय, नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वत्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रण कला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपनी सानी नहीं रखते थे। प्राचीन काल में मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन-फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।

पुराने समय में पुस्तकालय में अधिक व्यय क्यों होता था?
Question No: 9Difficulty: mediumMarks: 1mcqAnswered correctly: 18%
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साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय, सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिये कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय, नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वत्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रण कला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपनी सानी नहीं रखते थे। प्राचीन काल में मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन-फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।

साहित्य की उन्नति का सबसे अधिक महत्वपूर्ण साधन क्या है-
Question No: 10Difficulty: mediumMarks: 1mcqAnswered correctly: 0%
निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय, सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिये कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय, नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वत्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रण कला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपनी सानी नहीं रखते थे। प्राचीन काल में मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन-फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।

पुस्तकालय का प्रारम्भ कब से हुआ?

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